शेर-ओ-शायरी

  << Previous आँखें  (Eyes)   Next >>

देखो न आंखें भरकर किसी के तरफ कभी,
तुमको खबर नहीं जो तुम्हारी नजर में हैं।
-'असर' लखनवी

*****


देखो तो चश्मे - यार की जादूनिगाहियाँ,
हर इक को है गुमां कि मुखातिब हमीं से हैं।
-हसरत मोहानी

1.चश्मे–यार - माशूक की आँख 2.मुखातिब - सम्बोधन कर्त्ता, बोलने वाला, वार्ता करने वाला

*****

नजर जिसकी तरफ करके निगाहें फेर लेते हो,
कयामत तक उस दिल की परेशानी नहीं जाती।

-आनन्द नारायण 'मुल्ला'

*****

नजर में ढलके उभरते हैं दिल के अफसाने
ये और बात है कि दुनिया नजर न पहचाने
यह बज्म देखी है मेरी निगाह ने कि जहाँ
बगैर शम्अ भी जलते रहते हैं परवाने।

-सूफी तबस्सुम (सूफी गुलाम मुस्तफा)

 

*****
 

<< Previous   page - 1-2-3-4-5-6-7-8-9-10-11-12-13-14-15-16-17-18-19  Next >>