शेर-ओ-शायरी

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निगाहे-मस्त से मुझको पिलाये जा साकी,
हसीं निगाह भी जामे-शराब होती है।
-सामर अजमेरी

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निगाहे-लुत्फ से इकबार मुझको देख लेते है,
मुझे बेचैन करना जब उन्हें मंजूर होता है।

1.निगाहे-लुत्फ - कृपादष्टि, मेहरबानी की निगाह

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पीते-पीते जब भी आया तेरी आंखों का खयाल,
मैंने अपने हाथ से तोड़े हैं पैमाने बहुत।

-हुनर टौंकी

1.पैमाने - शराब पीने का गिलास, पान-पात्र


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पैगाम लिया है कभी पैगाम दिया है,
आंखों ने मुहब्बत में बड़ा काम किया है।

-हफीज बनारसी

 

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फिर न कीजे मेरी गुस्ताख निगाहों का गिला,
देखिये आपने ने फिर प्यार से देखा मुझको।

-'साहिर' लुधियानवी

 

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