शेर-ओ-शायरी

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बज्म में बर्के – नजर है सद - तमन्ना आफ्रीं,
दिल में है महफिल कोई या दिल मेरा महफिल मैं है।


1.बज्म - महफिल 2. बर्के–नजर - बिजली गिराने वाली नजर 3. सद - शत, एक सौ 4.आफ्रीं - धन्यवाद, शाबाश, साधु-साधु


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बस इक लतीफ तबस्सुम बस इक हसीन नजर,
मरीजे-गम की हालत सुधर तो सकती है

1.लतीफ - (i) कोमल, नर्म, मृदुल, नाजुक (ii) पवित्र, पाकसाफ

2.तबस्सुम - मुस्कान, मुस्कुराहट, स्मित

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बसा फूलों की नकहत में लिये मस्ती शराबों की,
महकता, लहलहाता एक काफिर का शबाब आया।
-असर लखनवी

1.नकहत - खुशबू, सुगन्ध, महक 2. काफिर - बहुत सुन्दर स्त्री

3.शबाब - जवानी, युवावस्था, तारूर्ण्य

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बात करने में फूल झड़ते हैं, बर्क गिरती है मुस्कराने में,
नजरें जैसे फराखदिल साकी खुम, लुढाये मैखाने में।

-'अख्तर' अंसारी

1.बर्क - बिजली, तड़ित, चपला 2.फराखदिल - दिल खोलकर खाने-खिलाने या पीने-पिलाने वाला, दरियादिल 3.खुम - घड़ा, शराब रखने का मटका


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मस्त आंखों पर घनी पलकों की छाया यूँ थी,
जैसे कि हो मैखाने पर घरघोर घटा छाई हुई।

असर' लखनवी 


1.मैखाना  - शराबखाना
 

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