शेर-ओ-शायरी

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साकी तेरे निगाह की क्या सियाहकारियाँ हैं
मैख्वार होश में हैं , जाहिद बहक रहा है।

-महेश चन्द नक्श


1.सियाहकारियाँ - पाप कर्म, गुनाह 2.मैख्वार - शराबी 3. जाहिद - संयमी, विषय-विरक्त, संयम, नियम और जप-तप करने वाला व्यक्ति

 

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सौ तीर जमाने का इक तीरे - नजर तेरा,
अब क्या कोई समझेगा, दिल किसका निशाना है?

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सौ-सौ उम्मीदें बंधती है, इक-इक निगाह पर,
मुझको न ऐसे प्यार से देखा करे कोई।

-इकबाल

 

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हट गई नजरों से नजरें मैकदा-सा लुट गया,
मिल गई नजरों से नजरें, मैकशी होने लगी।

-कलीम वरनी


1.मैकदा - खराबखाना, मैखाना 2.मैकशी - शराब पीना

 

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होता है राजे-इश्को-मुहब्बत इन्हीं से फाश,
आंखें जुबाँ नहीं है मगर बेजुबाँ नहीं।

-असगर गौण्डवी


1.फाश - प्रकट, व्यक्त, जाहिर

 

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