शेर-ओ-शायरी

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आँखों से हाल पूछा दिल का,
एक बूंद टपक पड़ी लहू की।

-मीरतकी 'मीर'

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आया है अगर जिक्र कभी  दारो-रसन का,
गैसू-व-कदे-यार की बात आ ही गई है।
जब सूर्खिए-गुलशन का कभी जिक्र हुआ है
तेरे लबो-रूखसार की बात आ ही गई है
ढूँढ़ा है अगर जख्मे - तमन्ना
ने  मुदावा
इक नर्गिसे-बीमार की बात आ ही गई है
छेड़ा  है कोई तल्ख फसाना जो  किसी ने
शीरीनिए-गुफ्तार की बात आ ही गई है।

-मज्हर इमाम

1.दारो – रसन - फांसी का फंदा 2.गैसू-व-कदे-यार - माशूक का डील-डौल और बाल 3.सूर्खिए-गुलशन - गुलशन की लालिमा या लाली (यानी खूबशूरती) 4. लबो-रूखसार - ओष्ठ और गाल 5.जख्मे–तमन्ना - तमन्ना पूरा न होने का जख्म 6.
मुदावा  - इलाज, दवा 7.नर्गिसे-बीमार- चश्मे-बीमार, अधखुली आँख विशेषतः प्रेमिका की आँख के लिए बोलते हैं। 8.तल्ख - कड़वा, कटु, अरूचिकर 9.शीरीनिए-गुफ्तार - बात-चीत की मिठास

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अश्क बनकर आई हैं वह इल्तिजाएं चश्म तक,
जिनको कहने के लिए होठों पै गोयाई नहीं।

-आनन्द नारायण मुल्ला

1.इल्तिजा - प्रार्थना , दरखास्त 2.चश्म - आँख, नेत्र
 3.गोयाई - बोलने की ताकत


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उन आंखों की हालत कुछ ऐसी है,
जैसे उठे मैकदे से कोई चूर होकर।

-अब्दुल हमीद 'अदम'

1. मैकदे - शराबखाना, मदिरालय

 

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