शेर-ओ-शायरी

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गमजे भी हैं खूरेज, निगाहें भी हैं  सफ्फाक,
तलवार के बांधे से तो कोई कातिल नहीं होता।

-मिर्जा दाग

1.गमजा -
आँख का इशारा 2.खूरेज - खून बहाने वाले, निर्दय, बेरहम 3.सफ्फाक - रक्तपाती, खून बहाने वाला, निष्ठुर, संगदिल, अत्याचारी, जालिम

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 गुलों की गोद में जैसे नसीम आकर मचल जाए,
उसी अंदाज से उन पुरखुमार आंखों में ख्वाब आया।

-'असर' लखनवी

1. नसीम - ठंडी और धीमी हवा 2.पुरखुमार - नशे में चूर, मस्त


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चारासाजों! तुम पहले उनकी नजर को देखो,
फिर मेरे दिल को देखो, मेरे जिगर को देखो।

-'दिल' शाहजहाँपुरी

1.चारासाज - चिकित्सक

 

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