शेर-ओ-शायरी

  आरज़ू  (desires)  Next >>

अच्छा है डूब जाये सफीना हयात का,
उम्मीदो-आरजूओं का साहिल नहीं रहा।

-'असर' लखनवी

1.सफीना- नाव, नौका, किश्ती 2. हयात-जिन्दगी

3. साहिल- किनारा, तट।

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अरमां को दबाते हैं तो मुसीबत में है जां और,
शोला को दबाते हैं तो उठता है धुंवा और।

-आनन्द नारायण मुल्ला     

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आने लगा हयात को अंजाम का खयाल,
जब आरजूएं फैलकर इक दाम बन गईं।

-बाकी सिद्दकी

1. हयात - जिंदगी 2.अंजाम - परिणाम 3..दाम - पाश, फंदा, जाल


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आसान नहीं इस दुनिया में, ख्वाबों के सहारे जी लेना,
संगीन-हकीकत है दुनिया, यह कोई सुनहरी ख्वाब नहीं।

-'सागर' निजामी

1.संगीन-हकीकत - कड़वी सच्चाई वाली

 

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