शेर-ओ-शायरी

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फलक को जिद है जहाँ बिजलियाँ गिराने की,
हमें भी जिद है वहीं आशियाँ बनाने की।


1. फलक- आकाश, आसमान, अर्श 2. आशियाँ - घोंसला,आशियाना, नीड़

 

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बस ऐ बहार तेरी अब जरूरत नहीं रही,
बुलबुल ने कर दिया है निशेमन सुपूर्दे-जाग।


1. सुपूर्दे-जाग - कौए को सुपूर्द

 

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बहाना मिल न जाये बिजलियों को टूट पड़ने का,
कलेजा काँपता है आशियाँ को आशियाँ कहते।

-'असर' लखनवी

 

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बिजलियाँ अपना जोर दिखाती रहीं,
और हम आशियाना बनाते रहे।

 

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