शेर-ओ-शायरी

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मेरी नजरों में खाक आशियाँ भी आशियाँ होंगे,
जिन्हें हैं बिजलियों का खौफ फिक्रे-आशियां कर लें।


1. खाक -बर्बाद

 

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मेरे कैद का दिलशिकन मामला था,
बहार आ गई थी, आशियाँ बन गया था।

-साकिब लखनवी


1. दिलशिकन - दिल को तोड़ने वाला, रंज पहुंचाने वाला

 

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यह सोचते रहे और बहार खत्म हुई,
कहाँ चमन में आशियाना बने या न बने।

-'असर' लखनवी

 

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यहाँ तंगिए-कफस है वहाँ खत्म आशियाना
न यहाँ मेरा ठिकाना, न वहा मेरा ठिकाना
इक शाखे-सिरनगूँ पर रख लेंगे चार तिनके के
न बुलन्द शाख होगी, न जलेगा आशियाना ।


1. तंगिए-कफस -पिंजड़े की तंग जगह 2. शाखे-सिरनगूँ -झुकी हुई डाल

 

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