शेर-ओ-शायरी

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ये ताइराने-चमन किस तरह से हों दिलशाद
कदम - कदम पै ही तकदीर इनकी फूट गई
रिहा हुए कफस से तो आशियाना गुम था
जो आशियाना बनाया तो शाख टूट गई।


1. ताइराने-चमन -चमन के पंछी

2. दिलशाद -खुश, प्रसन्न 3. कफस - पिंजड़ा

 

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रस्मे-दुनिया है, कोई खुश हो, कोई नाशाद हो,
जब उजड़ जाए चमन तो कफस आबाद हो।


1.नाशाद - जो खुश न हो, अप्रसन्न, खिन्न

2. कफस -(i) पिंजड़ा (ii) कारागार

 

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रहा बर्के-तपां से साबिका तकदीर में इतना,
कि अब अपना निशेमन हम बनाते हैं शरारों में।

-आसी उल्दानी


1. बर्के-तपां -कौंधती बिजली 2. साबिका - वास्ता, संबंध

3. निशेमन - घोसला, नीड़, कुलाय 4. शरारों - अग्निकण, चिंगारी

 

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वह ताइरे-असीर कहाँ जायें क्या करें,
आजाद होके जिसको नसीब आशियाँ न हो।

-असर लखनवी


1. ताइरे-असीर - (पिंजड़े में) कैद पंछी
 

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