शेर-ओ-शायरी

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हमको फंसना था कफस में क्या गिला सैयाद का,
बस तरसते ही रहे हैं आब और दाने के हम।

-'नजीर' अकबराबादी


1. कफस – पिंजड़ 2. सैयाद -बहेलिया, आखेटक, चिड़ीमार 3. आब -पानी

 

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हमने अपने आशियाँ के वास्ते,
जो चुभे दिल में वही कांटे चुने।

-रियाज खेराबादी

 

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हमने बना लिया है, नया फिर से आशियाँ,
जाओ यह बात फिर किसी तूफां से कहो।

-कतील शिफाई


1. आशियाँ - घोसला, नीड़, कुलाय
 

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हिफाजत करने वाले खिरमनों के मुतमईन बैठें,
तजल्ली बर्क की महदूद मेरे आशियाँ तक है।

-'अजीज' लखनवी


1. खिरमन - खलियान, भूसा निकाला हुआ या भूसा मिला हुआ अन्न का ढेर जो खलियान में रखा होता है। 2. मुतमईन - (i) बेफिक्र, निश्चिन्त (ii) संतुष्ट, (iii) आनन्दपूर्वक, खुशहाल 3. तजल्ली - (i) रौशनी, प्रकाश, नूर (ii) तेज, प्रताप, जलाल 4. बर्क - (i) बिजली, चपला, तड़ित (ii) विद्युत, प्रयोग में आने वाली बिजली 5. महदूद - सीमित

 

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हुजूमे - तबाही से मैं खेलता हूँ,
तबाही का हर –सू निशां है तो क्या है?
बना लूँगा ऐसे हजार आशियाँ मैं,

अगर शोलाजन आशियाँ है तो क्या गम।
-निहाल सेहरारवी


1. हुजूमे–तबाही -तबाहियों के हुजूम 2. हर–सू -चारों ओर

3. शोलाजन - जलता हुआ, आग की लपटों पर
 

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