शेर-ओ-शायरी

<< Previous   आशियाना  (Nest) Next >>

आशियाँ फूंका है बिजली ने जहाँ सौ मर्तबा,
फिर उन्हीं शाखों पै, तरहे-आशियाँ रखता हूँ मैं।

-निहाल सेहरारवी

1. तरहे-आशियाँ - घोसले की नींव या बुनियाद


*****

इधर-उधर, यहाँ-वहाँ हैं बिजलियाँ ही बिजलियाँ,
चमन-चमन कहाँ फिरूँ मैं आशियाँ लिये हुए।


*****

 इसी वास्ते है पैहम नजर, इस पै बिजलियों की,
है सजी हुई गुलों से, मेरी शाखे -आशियाना।


1. पैहम - लगातार, अनवरत

2.शाखे –आशियाना - डाली जिस पर आशियाना  बना हो

*****

एक शरारा भी आशियाँ को जला देता है,
नादां है तू शोलों को हवा देता है।


1.शरारा - चिनगारी, अग्निकण

*****

 

<< Previous   page -1-2-3-4-5-6-7-8-9-10-11-12-13-14-15  Next >>