शेर-ओ-शायरी

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कफस से छूटकर पहुँचे न हम दीवारे-गुलशन तक,
रसाई आशियाँ तक किस तरह बेबालोपर होती।

-जलील मानिकपुरी

1.कफस - पिंजड़ा 2. रसाई - पहुँच

3. बेबालोपर - जिसके पास जीविका का कोई साधन न हो

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कफस से छूटने पै शाद थे हम कि लज्जते-जिन्दगी मिलेगी,
यह क्या खबर थी कि बहारे-गुलशन लहू में डूबी हुई मिलेगी।

-अब्दुल हमीद 'अदम'

1. कफस - पिंजड़ा, कारावास


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कभी आशियाँ की तमन्ना मुसलसल,
कभी आशियाँ तक गये, लौट आये।

-कमर शेरवानी


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कभी गुलशन में रहते थे, कफस में अब गुजरती है,
खता सैयाद की क्या है, हमारा आबो-दाना है।


1. कफस - पिंजड़ा 2. सैयाद - बहेलिया, चिड़ीमार
 


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