शेर-ओ-शायरी

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कभी बिजली, कभी गुलचीं, कभी सैयाद की नजरें,
गुजरगाहे-हवादिस था, हमारा आशियाँ क्या था।

-'शौकत' थानवी

1.गुलचीं - फूल तोड़ने वाला, माली 2. सैयाद - बहेलिया, चिड़ीमार

3. गुजरगाह - निकलने-पैठने का स्थान, मार्ग, रास्ता, पंथ

4. हवादिस - दुर्घटनाए

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किधर है बर्के-सोजां काश यह हसरत भी मिट जाती,
बनायें तिनके चुन-चुनकर हम अपना आशियाँ कब तक।

-दिल शाहजहाँपुरी

1.बर्के-सोजां - कौंधती बिजली

 

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किधर है बर्के-सोजां काश यह हसरत भी मिट जाती,
बनायें तिनके चुन-चुनकर हम अपना आशियाँ कब तक।

-दिल शाहजहाँपुरी

1.बर्के-सोजां - कौंधती बिजली


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कौन इस तर्जे-जफा-ए-आसमाँ की दाद दे,
बाग सारा फूँक डाला, आशियाँ रहने दिया।

-'अदीब' सहारनपुरी

1. जफा - सितम, अत्याचार


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खताओं पर खताएं हो रही थी नावकअफगन से,
इधर तीरों से बनता जा रहा था आशियाँ अपना।


1. खता - गलती 2. नावकअफगन - तीर चलाने वाला, तीरंदाज


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