शेर-ओ-शायरी

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चमन में यूँ तो कहने को बहुत हैं आशियाँ लेकिन,
गिरेगी जिसपै कल बिजली वह मेरा आशियाँ होगा।

 

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चार तिनके ही सही पर ऐ सैयाद
मेरी दुनिया थी आशियाने में।

-कैस शैखपुरी


1.सैयाद - बहेलिया, चिड़ीमार, आखेटक
 

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छीन ली फ़िक्र-ए-निशेमन ने मेरी आजादियाँ,
जज्बा-ए-परवाज महदूदे-गुलिस्ताँ हो गया।

-सीमाब अकबराबादी


1
.निशेमन - घोंसला, नीड 2. परवाज - उड़ान 3.महदूद - सीमित

 

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जल के आशियाँ अपना खाक हो चुका कब का,
अब तक यह आलम है, रौशनी से डरते हैं।

 

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