शेर-ओ-शायरी

  आज़ादी (Freedom)

फकत एहसासे-आजादी  से आजादी इबारत है,
वही घर की दीवार है, वही दीवार,
ज़िन्दां की।

-सीमाब अकबराबादी


1.इबारत - कायम 2.
ज़िन्दां - कारागार, जेल

 

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मजा यह है कि जब हम ताकते - परवाज खो बैठै,
कफस ने कहा चुपके से जा तुम्हें आजाद करता हूँ।


1. परवाज - उड़ान 2.कफस - पिंजड़ा
 

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माना कि फिक्रे- बर्को - गमे – बागबाँ नहीं,
फिर भी कफस, कफस ही तो है आशियाँ नहीं।


1. फिक्रे-बर्को-गमे–बागबाँ - बिजली की चिंता और माली का डर 2.कफस - पिंजरा

 

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लाजिम है दिल के पास रहे पासबाने-अक्ल,
लेकिन कभी-कभी उसे तन्हा भी छोड़ दें।

-मोहम्मद इकबाल


1.पासबाने-अक्ल - अक्ल का प्रहरी

 

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सब जिसको असीरी कहते हैं वह है तो असीरी ही लेकिन,
वह कौन-सी आजादी है यहाँ, जो आप खुद अपना दाम नहीं।

-जिगर मुरादाबादी


1.असीरी - कैद, कारावास 2. दाम - जाल, फंदा, पाश
 

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सैयाद तेरा घर मुझे जन्नत सही मगर,
जन्नत से भी सिवा,
मुझे राहत चमन में थी।


1.सैयाद - बहेलिया, चिड़ीमार 2.सिवा -अधिक, जियादा

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