शेर-ओ-शायरी

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अमल से जिन्दगी बनती है, जन्नत भी जहन्नुम भी,
यह खाकी अपनी फितरत से न नूरी है, न नारी है।

-मोहम्मद इकबाल


1.अमल- कर्म, काम, कार्य 2.फितरत- आदत, स्वभाव

3.नूरी- स्वर्ग के योग्य 4. नारी- नरक के योग्य
 

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अमल-अमल ही रहेगा सिला मिले न मिले,
जबाने-खत्क पै है, नामे-कोहकन बाकी।

-आनन्द नारायण मुल्ला


1.अमल- कर्म, कार्य 2.सिला - (i) पुरस्कार, इनाम (ii) उपहार, तोहफा 3.जबाने-खत्क - जनता की जुबान 4.नामे-कोहकन -'शीरी' के प्रेमी फर्हाद की उपाधि जिसने शीरी की आज्ञा से पहाड़ काटते हुए अपने प्राण दे दिए

 

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एक पत्थर की तकदीर भी संवर सकती है,
शर्त यह है कि उसे सलीके से संवारा जाए।

 

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एक पल रूकने से दूर हो गई मंजिलें,
सिर्फ हम नहीं चलते, रास्ते भी चलते हैं।


 

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ऐ मौत आ के हमको खामोश तो कर गई तू,
मगर सदियों दिलों के अंदर, हम गूंजते रहेंगे।

-फिराक गोरखपुरी

 

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