शेर-ओ-शायरी

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सियहबख्ती में कब कोई किसी का साथ देता है,
कि तारीकी में साया भी जुदा रहता है इंसा से।

-नासिख


1.तारीकी - अंधकार, अंधेरा 2.
सियहबख्ती - बदनसीबी
 

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हम आह भी भरते हैं तो हो जाते हैं बदनाम,
वह कत्ल भी करते हैं तो चर्चा नहीं होती।

 

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हम कारवाँ के साथ हैं लेकिन है इस तरह,
जैसे बिछड़ गये हों किसी कारवाँ से हम।

-जौहर कोटवी

 

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हम न आए फिर चमन में लौटकर,
मौसमे-गुल बार- बार आता रहा।


मौसमे-गुल - बहार का मौसम।

 

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