शेर-ओ-शायरी

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उम्मीदी - नाउम्मेदी का वहम होना वही जाने,
कि जिसने कश्तियों को डूबते देखा हो साहिल पर।


1.साहिल - किनारा, तट

 

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उम्रे-दराज मॉंगकर लाये थे चार दिन
दो आरजू में कट गये, दो इन्तिजार में
कितना है बदनसीब 'जफर' दफ्न के लिये
दो गज जमीं भी न मिली कू-ए-यार में।

-बहादुर शाह 'जफर'


1. दराज - लंबी, तवील 2. कू-ए-यार - प्रेमिका की गली
[यानी स्वदेश में या अपने  देश में जहाँ  उसकी पत्नी ( बहादुर शाह ज़फर की ) रहती थी]
 

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कई मिल रेत को काटकर कोई मौज फूल खिला गई,
कोई पेड़ प्यास से मर रहा है नदी के पास खड़ा हुआ।

-अब्दुल हमीद 'अदम'

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कफस से छूटकर पहुँचे न हम दीवारे-गुलशन तक,
रसाई आशियाँ तक किस तरह बेबालोपर होती।

-जलील मानिकपुरी


1.कफस - पिंजड़ा 2. रसाई - पहुँच 3. बेबालोपर - जिसके पास जीविका का कोई साधन न हो

 

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