शेर-ओ-शायरी

   << Previous  बदनसीबी  (Bad luck)  Next>>

लुटते अगर खिजाँ में तो कोई बात ही न थी,
हमको तो रंज है कि लुटे हैं बहार में।

-चाँद


1. खिजाँ - पतझड़ की ऋतु

 

*****

 

वह ताइरे - असीर कहाँ जाये क्या करे,
आजाद होके जिसको नसीब आशियाँ न हो।

-'असर' लखनवी
1.ताइरे-असीर- पिंजड़े में बंद पंछी।
 

*****

 

वह तिरहबख्त हकीकत में है जिसे 'मुल्ला',
किसी निगाह के साये की चाँदनी न मिली।

-आनन्द नारायण 'मुल्ला'


1.तिरहबख्त - बदनसीब, अभागा, बदकिस्मत

 

*****


वादिए-उल्फत में देखी हमने कब मंजिल की शक्ल,
गिर पड़े, गिरकर उठे, उठकर संभलते ही रहे।

-नूह नारवी


1. वादी - (i) घाटी, पहाड़ के नीचे का मैदान (ii) मैदान, वन

 

*****

<< Previous  page - 1-2-3-4-5-6-7-8-9-10-11  Next>>