शेर-ओ-शायरी

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वाय किस्मत नाव डूबी आके साहिल के करीब,
देखता ही रह गया साहिल को मैं, साहिल मुझे।

-'सादिक' झुनझुनवी


1. साहिल - तट, किनारा

 

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सारे जहाँ की धूप मेरे सर पै आ पड़ी,
मुझ पर किसी दरख्त का साया था, कट गया।

-खाकान खावर
 

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सारे जहाँ की धूप मेरे सर पै आ पड़ी,
मुझ पर किसी दरख्त का साया था, कट गया।

-खाकान खावर
 

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सियहबख्ती तो पैवस्ते-जबीं है,
मिटाऊँ दागे-नाकामी कहाँ तक।

-'दिल' शाहजहाँपुरी


1.सियहबख्ती - बदनसीबी 2. पैवस्ते-जबीं - माथे में गहरी लिखी हुई

 

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