शेर-ओ-शायरी

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खिजाँ को सहने-गुलिस्ताँ से गये जमाना हुआ लेकिन,
अभी तक फजा - ए -गुलिस्ताँ में उड़ रहा है गुबार।

-जगन्नाथ आजाद


1.खिजाँ - पतझड़ ऋतु 2.सहन - आंगन 3.गुबार - (i) धूल, रज

(ii) मनोमालिन्य, दिल का मैल

 

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खिजाँ- नसीब मुकद्दर का दिल न दुख जाए,
चमन में शोर है फस्ले - बहार आने का।

-नदीम कासिमी


1.नसीब - बदनसीब, बदकिस्मत, जिसके नसीब में खिजां ही हो

2.फस्ले - बहार- बहार, बसंत ऋतु

 

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जो काफिले खिजाँ से भी लूटे न जा सके,
लुट गए वो काफिले फस्ले - बहार में।

-राही शिहाबी

 

2.फस्ले - बहार- बहार का मौसम  बसंत ऋतु

 

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देखना है तो मेरा रंग खिजाँ में देखो,
फस्ले-गुल में तो हर चीज निखर जाती है।


1.खिजाँ - पतझड़ की ऋतु 2.फस्ले-गुल- वसंत ऋतु, बहार का मौसम 
 

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