शेर-ओ-शायरी

 बंदगी  (Worship)   Next >>

खुलूसे-दिल से हों सिज्दे तो उन सिज्दों का क्या कहना,
सरक आया वहीं काबा जहाँ हमने जबीं रख दी।


1.खुलूसे-दिल से - सच्चे दिल से 2. काबा - मक्के की एक इमारत जिसे मुसलमान ईश्वर का घर समझते हैं 3. जबीं - माथा, ललाट, भाल

 

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जबीने-सिज्दा में कौनेन की वुसअत समा जाए,
अगर आजाद हो कैदे-खुदी से बंदगी अपनी।

-'असर' लखनवी


1.जबीन - माथा, ललाट, भाल 2.कौनेन - दोनों संसार, यह संसार और ऊपरी संसार (यानी परलोक) 3.वुसअत - लंबाई-चौड़ाई 4.खुदी - अहंकार, अहंभाव, यह भाव कि बस हमीं हम है, अभिमान, घमंड, गर्व

5.बंदगी- इबादत, पूजा

 

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जहाँ सिज्दे को मन आया वहीं पर लिया सिज्दा,
न कोई संगे - दर अपना न कोई आस्तां अपना।


1.
सिज्दा  - ईश्वर के लिए सर झुकाना, नमाज में जमीन पर सर रखना 2.संगे–दर- चौखट 3.आस्तां - दहलीज, ड्योढ़ी, चौखट

 

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जो नफस तेरी याद में गुजरे,
वह बंदगी में शुमार होता है।
-अब्दुल हमीद अदम


1.नफस - सांस 2.शुमार - गिनती

 

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