शेर-ओ-शायरी

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इतना करीब आके भी क्या जाने किस लिए,
कुछ अजनबी से आप हैं, कुछ अजनबी से हम।

-शकील बंदायुनी
 

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उन गुलों से तो कांटे अच्छे,
जिनसे होती है तौहीने- गुलशन।


1.तौहीने- गुलशन - बगिया की बेइज्जती

 

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होने को यूँ तो लाख है अपने मगर 'अजीज',
अपना वही है, वक्त पै जो काम आ गया।

-'अजीज' बीकानेरी

 

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एक से लगते हैं सब ही कौन अपना, कौन गैर,
बेनकाब आये कोई तो, हम दरे -दिल वा करें।

-खलील


1.दरे –दिल - दिल का दरवाजा 2. वा -खोलना

 

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करते किस मुँह से हो गुरबत की शिकायत'गालिब',
तुम्हें बेमेहरिए - याराने - चमन याद नहीं।

-मिर्जा गालिब


1. गुरबत - परदेशी होना, परदेश 2. चमन - चमन (यानी अपने देश में) में रहने वाले दोस्तों की निष्ठुरता या बेरहमी या निर्ममता
 

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