शेर-ओ-शायरी

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कल जो अपने थे अब पराये हैं, क्या सितम आसमाँ ने ढाये हैं,
दिल दुखा होंठ मुस्कुराये है, हमने ऐसे भी गम उठाये हैं।

-'बेताब' अलीपुरी

 

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किसी ने तुझे आज क्या कह दिया,
नजर आ रहे हो पराया - पराया।

-बाकी सिद्दकी

 

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खुलूसे-रहजन ने
मुझे  इतना गिरवीदा बनाया है,
फरेबे-रहनुमा खाने की गुजाइश बहुत कम है।
-अब्दुल हमीद अदम


1.खुलूस - निष्कपट प्यार 2.रहजन- बाटमार, लुटेरा 3.गिरवीदा - (i)मुग्ध,  मोहित, लट्टू (ii) प्रेमी, आशिक 4.रहनुमा - मार्गदर्शक, रास्ता दिखाने वाला

 

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गैरों की बात छोड़िए गैरों से क्या मिला,
अपनों ने क्या दिया हमें, अपनों से क्या मिला।
 

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