शेर-ओ-शायरी

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जमाना बड़े गौर से सुन रहा था,
हमीं सो गये, दास्तां कहते -कहते।
-'साकिब' लखनवी
 

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जो नजर की इल्तिजा समझा नहीं,
हाथ उसके सामने फैलायें क्या?
-'शातिर' हाकिमी


1. इल्तिजा - प्रार्थना, दरखास्त

 

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झूठे वादे भी नहीं करते आप,
कोई जीने का सहारा भी नहीं।
-जलील मानिकपुरी
 

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तअम्मुल तो था उनके आने में कासिद,
मगर यह बता तर्जे-इन्कार क्या थी।
-मोहम्मद इकबाल

1.
तअम्मुल-संकोच, असमंजस, पसोपेश  2.कासिद - डाकिया
 

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