शेर-ओ-शायरी

<< Previous  बेरुखी  (Irresponsiveness) Next >>

तेरे सवाल पै चुप हैं, इसे गनीमत जान,
कहीं जवाब न दे दें कि मैं नहीं सुनता।
-मिर्जा गालिब

 

*****

थके मुद्दतों राह में जिनकी चलकर,
वो दर तक भी आये न घर से निकलकर।
-अमीर मीनाई


1. दर-
दहलीज, दरवाजा, द्वार

 

*****

दिल में कमी कुछ ऐसी महसूस हो रही है,
नजदीक आके जैसे बहुत दूर हो गये है।
-अब्दुल हमीद अदम

 

*****

दिले-नादाँ तुझे हुआ क्या है, आखिर इस दर्द की दवा क्या है,
हम हैं मुश्ताक और वो बेजार या इलाही ये माजरा क्या है?
हम भी मुंह में जुबान रखते हैं, काश पूछो कि मुद्दआ क्या है,
हमको उनसे वफा की है उम्मीद जो नहीं जानते वफा क्या है
जान तुम पर निसार करता हूँ, मैं नहीं जानता दुआ क्या है?
-मिर्जा गालिब


1.मुश्ताक -
अभिलाषी, ख्वाहिशमंद 2.बेजार- (i) विमुख, मुंह फेरे हुए (ii) क्रुद्ध, अप्रसन्न, नाखुश 3.इलाही - हे खुदा
 

 *****

 

<< Previous   page  -1-2-3-4-5-6-7-8-9-10-11-12-13-14-15-16-17-18-19-20-21-22-23  Next>>