शेर-ओ-शायरी

<< Previous  बेरुखी  (Irresponsiveness) Next >>

देखे हैं इतने ख्वाब कि अब अपने रू-ब-रू,
उनको भी देख लूँ तो समझता हूँ ख्वाब है।

 

*****

दैर में या हरम में गुजरेगी,
उम्र तेरे ही गम में गुजरेगी।
-फानी बदायुनी

1.दैर - मुर्तिगृह, बुतखाना 2.हरम - काबा, खुदा का घर

 

*****

न जाने अश्क-से आंखों में आये हुए
हैं ,
गुजर गया है जमाना, तुझे भुलाए हुए।
-फिराक गोरखपुरी

 

*****

न जाने किधर जा रही है यह दुनिया,
किसी का यहाँ कोई हमदम नहीं है।
-'असर' लखनवी

1हमदम - हर समय का साथी, दोस्त, मित्र।

 

 *****

 

<< Previous   page  -1-2-3-4-5-6-7-8-9-10-11-12-13-14-15-16-17-18-19-20-21-22-23  Next>>