शेर-ओ-शायरी

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नहीं मिलते तो इक अदना शिकायत है न मिलने की,
मगर मिलकर न मिलने की शिकायत और होती है।

-वामिक जौनपुरी

 

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पत्ता - पत्ता, बूटा - बूटा हाल हमारा जाने है,
जाने न जाने गुल ही न जाने बाग तो सारा जाने है।

-मीरत की मीर

 

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पास रहकर यह तकल्लुफ, साथ रहकर यह हिजाब,
मेरा उनका फासिला गोया कई मंजिल का है।

-'दिल' शाहजहाँपुरी

1.हिजाब - पर्दा 2.गोया - मानो, जैसे

 

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फिर गये आप मेरे कूचे से,
दो कदम पै गरीबखाना था।

-असर अजीमाबादी

1.कूचे - गली

 

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