शेर-ओ-शायरी

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बस इतनी दाद देना बाद मेरे मेरी उल्फत की,
कि याद आऊँ तो अपने आपको प्यार कर लेना।
-ताजवर नजीमाबादी

1.उल्फत - प्यार, मुहब्बत

 

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बाकी है लहू दिल में तो हर अश्क से पैदा,
रंगे - लबो- रूखसारे – सनम करते रहेंगे।
इक तर्जे -तगांफुल है सो उनको मुबारक,
इक अर्जे – तमन्ना है सो हम करते रहेंगे।
-फैज अहमद फैज

1. लब - ओष्ठ, होंठ 2.रूखसार - गाल, कपोल
3. सनम - महबूबा, माशूक
4.तर्जे –तगांफुल - उपेक्षा या बेतवज्जुही के अंदाज

 

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बेगानावार ऐसे वो गुजरे करीब से,
जैसे कि उनको मुझसे कोई वास्ता न था।
-अजहर कादिरी

1.बेगानावार - बेगानों की तरह

 

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बैठें तो किस उम्मीद पर बैठे रहे यहाँ,
उठे तो उठ के जायें कहाँ तेरे दर से हम।

- बिस्मिल हाशमी

1 दर - दरवाजा, आस्तां

 

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