शेर-ओ-शायरी

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आप पछताएं नहीं जौर से तौबा न करें,
आप के सर की कसम 'दाग' का हाल अच्छा है।

-मिर्जा दाग


1.जौर - जुल्मोंसितम, अत्याचार 2.तौबा - त्याग, तर्क, छोड़ देना

 

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आप की खातिर से हम करते हैं जब्ते-इज्तिराब,
देखकर बेताब मुझको और घबराते हैं आप।

-बहादुरशाह जफर


1. जब्ते-इज्तिराब - बेचैनी या बेकरारी पर काबू 2.बेताब - व्याकुल, बेचैन
 

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आये तो यूँ कि जैसे हमेशा थे मेहरबाँ,
भूले तो यूँ कि जैसे कभी आश्ना न थे।
-फैज अहमद फैज


1.आश्ना - (i) मित्र, दोस्त (ii) परिचित, जानकार, वाकिफ

 

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आह को चाहिए इक उम्र असर होने तक,
कौन जीता है तेरी जुल्फ के सर होने तक।
आशिकी सब्र - तलब और तमन्ना बेताब,
दिल का क्या रंग करूँ, खूने-जिगर होने तक।
हमने माना कि तगाफुल न करोगे लेकिन
खाक हो जायेंगे हम तुमको खबर होने तक
गमे-हस्ती का 'असद' किससे जुज-मर्ग इलाज,
शम्अ हर रंग में जलती है, सहर होने तक।
-मिर्जा गालिब


1.सर - सुलझना 2. सब्र-तलब - जिसमें सब्र (धीरज, धैर्य) की आवश्यकता हो 3.बेताब - (i) अधीर, बेसब्र (ii) ब्याकुल, बेचैन 4.तगाफुल - उपेक्षा, बेतवज्जुही 5. जुज-मर्ग - मौत के अलावा 6.सहर - सुबह, सबेरा, प्रातःकाल, भोर

 

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