शेर-ओ-शायरी

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वह नादिम हुए कत्ल करने के बाद,
मिली जिन्दगी मुझको मरने के बाद।

-'नूह' नारवी


1.नादिम - लज्जित, शर्मिन्दा, पछतानेवाला

 

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वहाँ जवाब की जहमत उठा रही है खिरद,
जहाँ सवाल खुद अपना जवाब होता है।

-अब्दुल हमीद अदम


1.जहमत - कष्ट, क्लेश, तकलीफ 2.खिरद - अक्ल, बुद्धि

 

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वही रंगे - तगाफुल है, वही नाजे – तगाफुल है,
न जज्बे-शौक काम आया, न तर्के-शौक का आया।

-'रविश' सिद्दकी


1.रंगे–तगाफुल - उपेक्षा या बेतवज्जुही के अन्दाज

2. नाजे–तगाफुल - उपेक्षा या बेतवज्जुही के हाव-भाव 
3.जज्ब - आकर्षण, कशिश 4.शौक - चाहत, अभिलाषा, उत्कंठा

5.तर्के-शौक - चाहत या अभिलाषा का त्याग

 

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वाँ वह गरूरे-इज्जो-नाज, यां यह हिजाबे-पासे-वज्अ,
राह में हम मिले कहाँ, बज्म में वह बुलाये क्यों?

-मिर्जा गालिब


1. इज्ज- बेबसी, असमर्थता या नम्रता,
विनीति

2.नाज - (i) मान, अभिमान (ii) नाजोअदा 3.हिजाब - आड़, ओट, पर्दा
4. पास - लिहाज, संकोच, शील 5.वज्अ - शैली, ढंग

6. बज्म - महफिल

 

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