शेर-ओ-शायरी

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वादा करके और भी आफत में डाला आपने,
जिन्दगी मुश्किल थी, अब मरना भी मुश्किल हो गया।

-जलील मानिकपुरी

 

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शिकायत जुल्मे-खजंर का नहीं गम है तो इतना है,
जबाने-गैर से क्यों मौत का पैगाम आया है?

-'साकिब' लखनवी

 

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सब्र करना सख्त मुश्किल है, तड़पना सहल है,
अपने बस का काम कर लेता हूं, आसां देखकर।

-यास और यगाना चंगेजी

 

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साजे-उल्फत छिड़ रहा था आसुंओं के तार पर,
मुस्कराये हम तो उनको बदगुमानी हो गई।

-शकील बदायुनी


1.साजे-उल्फत - मुहब्बत का साज (बाजा, वाद्य)

2. बदगुमानी - किसी की ओर से बुरा खयाल, कुधारणा

 

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