शेर-ओ-शायरी

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कभी यक-ब-यक तवज्जुह,कभी दफ्अतन तगाफुल,
मुझे आजमा रहा है कोई रूख बदल -बदल कर।

-शकील बदायुनी

1.तवज्जुह - (i) किसी की ओर मुंह करना, ध्यान देना, ध्यान

(ii) कृपा, दया, मेहरबानी 2.दफ्अतन - अचानक

 3.तगाफुल - उपेक्षा, ध्यान न देना, बेतवज्जुही

 

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करने गये थे उनसे तगाफुल का हम गिला,
की एक ही निगाह कि हम खाक हो गये।

-मिर्जा गालिब


1.तगाफुल - उपेक्षा, ध्यान न देना, बेतवज्जुही

 

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कहने को यूँ जहाँ में हजारों हैं यार-दोस्त,
मुश्किल के वक्त एक है, परवरदिगार दोस्त।

-असीर
 

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कहीं धब्बा न लग जाये तेरी बंदानवाजी पर,
मुझे भी देख मुद्दत से तेरी महफिल में रहते है।

-'आजाद' बारानवी

 

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