शेर-ओ-शायरी

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कितने नादिम हैं, वह खुद वादा-फरामोशी पर,
अब बुलाते भी नहीं शर्म के मारे मुझको।

1.नादिम -
शर्मिंदा, लज्जित 2.फरामोशी - भूलना

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किस-किस तरह से किया अपना जी निसार,
लेकिन न गई दिल से तेरी बदगुमानियाँ।

-हसरत मोहानी


1.बदगुमानियाँ -
 कुधारणाएं , गलतफहमियां

 

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कुछ तो मिल जाये लबे-शीरीं से,
जहर खाने की इजाजत ही सही।

-अनवर मिर्जापुरी

1.लबे-शीरीं - मीठे लब

 

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कोई कह दे कि क्या इलाज करूँ,
दर्द-ए-दिल में कमी नहीं होती।

-साजन पेशावरी

 

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