शेर-ओ-शायरी

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खयाल तक न किया अहले-अंजुमन ने कभी,
तमाम रात जली शमअ अंजुमन के लिए।
-वहशत कलकतवी


1.अहले-अंजुमन
ने - महफिल वालों ने

 

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खुदा के वास्ते पर्दा न काबे का उठा 'गालिब',
कहीं ऐसा न हो याँ भी वहीं काफिर सनम निकले।
-मिर्जा 'गालिब'

1. काबा - मक्के की एक इमारत, जिसे मुसलमान ईश्वर का घर समझते है 2. काफिर - सत्य को छुपाने वाला

3.सनम - मूर्ति, प्रतिमा, माशूक, प्रेमिका

 

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खुलूसे-रहजन ने मुझे इतना गिरवीदा बनाया है,
फरेबे-रहनुमा खाने की गुंजाइश बहुत कम है।
-अब्दुल हमीद 'अदम'


1.खुलूसे-रहजन - लूटेरे (यानी गैरों) का निष्कपट प्यार

2. गिरवीदा - आसक्त, मुग्ध, मोहित, लट्टू

3.फरेबे-रहनुमा - राह दिखाने वाले द्वारा दिया जाने वाला धोखा

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खुलेगा किस तरह मज्मून मेंरे मक्तूब का यारब,
कसम खई है उस काफिर ने कागज को जलाने की।
-मिर्जा 'गालिब'

1. मज्मून - निबंध, लेख, विषय, सब्जेक्ट

2. मक्तूब - पत्र, चिट्ठी 3. काफिर- बेवफा माशूक

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