शेर-ओ-शायरी

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गैरों पे हो रही हैं हजारों नवाजिशें,
अफसोस हम सितम के भी काबिल नहीं रहे।


1..नवाजिशें - मेहरबानियाँ, इनायतें
2.सितम - जुल्म, अत्याचार

 

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गैरों की बात छोड़िए गैरों से क्या मिला,
अपनों ने क्या दिया हमें, अपनों से क्या मिला।

 

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गैरों से कहा तुमने, गैरों से सुना तुमने,
कुछ हमसे कहा होता, कुछ हमसे सुना होता।
-हसरत चिराग हसन

 

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गैरों को क्या पड़ी है रूसवा मुझे करें,
इन साजिशों में हाथ किसी आशना का है।

1.रूसवा – बदनाम 2.आशना - परिचित, अपना


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