शेर-ओ-शायरी

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गो जरा - सी बात पर वर्षों का याराना गया,
लेकिन इतना तो हुआ कुछ लोग पहचाने गये।
-'खातिर' गजनवी

 

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छोड़ दे जो कुछ बचे हैं तीर वह भी छोड़ दे,
टूट जाये जो तिलिस्मे-जीस्त आबोगिल में है।


1. तिलिस्मे-जीस्त - जीवन का मायाजाल, जिन्दगी रूपी जादू का घर 2.आबोगिल - शरीर का ढांचा

 

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जख्म गहरे नहीं थे जब दिल के
दर्द  में इस कदर मिठास  न  थी,
आप  ही का ये  फैज है वरना

 जिन्दगी इस  कदर उदास  न थी।
-नरेश कुमार 'शाद'


1.फैज - दानशीलता, फैयाजी

 

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जड़ मेरी आज उसी शख्स ने काट दी,
थक के बैठा था कल जो मेरी छांव में।


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