शेर-ओ-शायरी

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जनाजा रोककर मेरा वह इस अंदाज से बोले,
गली हमने कही थी, तुम तो दुनिया छोड़े जाते हो।
-सफी लखनवी
 

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जब जब गैरों की इनायत देखी,
हमको अपनो के सितम याद आये।

1.इनायत - मेहरबानी, कृपा, दया, अनुकंपा 2. सितम - अत्याचार, जुल्म

 

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जमाना बड़े गौर से सुन रहा था,
हमीं सो गये, दास्तां कहते -कहते।
-'साकिब' लखनवी
 

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जमाने की अदावत का सबब थी दोस्ती जिसकी,
अब उनको दुश्मनी है हमसे दुनिया इसको कहते हैं।
-बेखुद देहलवी

1.अदावत – दुश्मनी 2. सबब - कारण

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