शेर-ओ-शायरी

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अपनों की दोस्ती ने सिखाया है यह सबक,
गैरों की दोस्ती भी इनायत से कम नहीं।

-'जोश' मल्सियानी


1.सबक - सीख, पाठ 2. इनायत - मेहरबानी
 

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अब इन्हें पहचानते भी शर्म आती है हमें,
फख्र करते थे कभी हम इनकी मुलाकातों पर।


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अब उतर आये हैं वह तारीफ पर,
हम जो आदी हो गये दुश्नाम के।

 

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अब वो मिलते भी हैं तो यूँ की कभी,
गोया हमसे कुछ वास्ता न था।

-हसरत मोहानी

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