शेर-ओ-शायरी

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तअज्जुब क्या लगी गर आग 'सीमाब' सीने में,
हजारों दिल में अंगारे भरे थे, लग गई होगी।

-सीमाब अकबराबादी


1.तअज्जुब - आश्चर्य, विस्मय

 

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तड़पते देखता हूँ जब कोई शै,
उठा लेता हूँ अपना दिल समझकर।

-तसलीम

 

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तमाम उम्र हम वफा के गुनहगार रहे,
यह और बात है कि हम आदमी तो अच्छे थे।

-नदीम कासिमी


1. वफा के गुनहगार - वफा के बदले वफा का न मिलना

 

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ता फिर न इन्तिजार में नींद आये उम्र भर,
आने का अहद कर गये, आये जो ख्वाब में।

-मिर्जा 'गालिब'


1. अहद – (i)प्रतिज्ञा, इकरार, वचन, कौल( ii )युग, काल, जमाना (iii) समय, वक्त 2. ख्वाब - स्वप्न, सपना

 

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