शेर-ओ-शायरी

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तुझको सौ सौ तरह से याद करके,
तुझको सौ सौ तरह से भुलाता हूँ।

-फिराक गोरखपुरी

 

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तुम मेरे लिए कोई इल्जाम न ढूँढ़ो
चाहा था तुम्हे, यही इल्जाम बहुत है।

-साहिर लुधियानवी
 

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तुम्हें गैरों से कब फुरसत, हम अपने गम से कब खाली,
चलो बस हो चुका मिलना, न तुम खाली, न हम खाली।

-हसरत मोहनी

 

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तूने जब से निगाह फेरी है,
ढूँढ़ता हूँ शराबखाने को।

-पारसा कौसरी
 

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