शेर-ओ-शायरी

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दहर में क्या-क्या हुए हैं इन्किलाबाते-अजीम,
आसमाँ बदला, जमीं बदली, न बदली खू-ए-दोस्त।
-'शाद' अजीमाबादी


1.दहर - दुनिया, जमाना 2.इन्किलाबाते-अजीम -बड़े-बड़े परिवर्तन

3.खू-ए-दोस्त - दोस्त का स्वभाव

 

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दर्द-ए-दिल, सोजे-जिगर, अश्के-रवाँ, दागे -फिराक
सच तो यह है आपके एहसाँ है मुझपर बेशुमार।
-त्रिलोकचन्द महरूम


1.सोजे-जिगर - दिल की तपिश या जलन 2.अश्के-रवाँ - बहते आंसू
3.दागे –फिराक - विरह का गम 4.बेशुमार - अनगिनत, असंख्य, बहुत अधिक

 

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दिल अभी पूरी तरह टूटा नहीं,
दोस्तों की मेहरबानी चाहिए।

-अब्दुल हमीद 'अदम'

 

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दिल की वीरानी का मज्कूर क्या,
यह नगर सौ मर्तबा लूटा गया।

-मीरतकी मीर


1.मज्कूर - जिक्र, चर्चा

 

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