शेर-ओ-शायरी

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निकलना खुल्द से आदम का सुनते आये थे लेकिन,
बड़े बेआबरू होकर तेरे कूचे से हम निकले।
खुदा के वास्ते पर्दा न काबे का उठा वाइज
कहीं ऐसा न हो याँ भी वही काफिर सनम निकले

-मिर्जा 'गालिब'


1.खुल्द - स्वर्ग, बहिश्त 2.कूचा - गली 3.काबा - मक्के की एक इमारत जिसे मुसलमान ईश्वर का घर समझते है
4. वाइज - धर्मोपदेशक, धर्माचार्य 5. काफिर - अकृतज्ञ, कृतघ्न
6. सनम - (i) मूर्ति, प्रतिमा, बुत (ii) माशूक, प्रेमिका

 

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निगाहें ढूढ़ती हैं दोस्त को और कहीं नहीं पातीं,
नजर उठती है जब जिस दोस्त पर, पड़ती है दुश्मन पर।

-फानी बदायूनी
 

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निगाहे-यार मुझसे आज बेतकसीर फिरती हैं,
किसी की कुछ नहीं चलती, जब तकदीर फिरती है।

-गाफिल


1.बेतकसीर - बिना किसी कुसूर के

 

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पीनस में गुजरते हैं जो कूचे से वह मेरे,
कंधा भी कहारों को बदलने नहीं देते।

-मिर्जा 'गालिब'


1.पीनस - पालकी

 

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