शेर-ओ-शायरी

<< Previous  बेवफाई (Ungratefulness) Next >>

आज फूलों की बेगानगी देखकर,
मुझको काँटों से दामन सजाना पड़ा।


1. बेगानगी - परायापन, अनजानापन, अस्वजनता

 

*****


आता नहीं खयाल अब अपना भी ऐ 'जलील',
इक बेवफा की याद ने सब कुछ भुला दिया।

-'जलील' मानिकपुरी


*****

आप कहते हैं बार-बार नहीं,
हमको हाँ का भी एतिबार नहीं।

-'रविश' सिद्दकी

 

*****

आप गैरों की बात करते हैं, हमने अपने भी आजमाए हैं,
लोग कांटों से बचके चलते है, हमने फूलों से जख्म खाए हैं।

-'बेताब' अलीपुरी


*****

 

 << Previous  page -1-2-3-4-5-6-7-8-9-10-11-12-13-14-15-16-17-18-19-20-21-22-23-24-25-26-27-28-29-30-31-32-33-34-35-36-37-38-39-40-41-42-43-44-45  Next >>