शेर-ओ-शायरी

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फलक के तारों से क्या दूर होगी जुल्मते-शब,
जब अपने घर के चरागों से रौशनी न मिली।

-आनन्दनारायण 'मुल्ला'


1. फलक - आकाश, आस्मान 2. जुल्मते-शब - रात का अंधकार

 

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फूल थे गैर की किस्मत में अगर ऐ जालिम,
तूने पत्थर ही फेंक के मुझे मारा होता।

- मिर्जा 'दाग'
 

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बड़े अरमान से चुना था जिनको दामन में,
किसे मालूम था वह फूल बन जायेंगे अंगारे।

-'प्रेम' वारबाटनी

 

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बर्ताव दोस्ती के हद से निकल गये हैं,
या तुम बदल गये हो या हम बदल गये हैं।

-'जोश' मलीहाबादी
 

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