शेर-ओ-शायरी

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मुहब्बत में नहीं है फर्क, जीने और मरने का,
उसी को देखकर जीते हैं जिस काफिर पै दम निकाला।

-मिर्जा गालिब


1.काफिर - बेवफा माशूक

 

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मेरा अज्म इतना बुलन्द है मुझे पराये शोलों का डर नहीं,
मुझे खौफ आतशे-गुल से है, कहीं ये चमन को जला न दें

-शकील बंदायुनी


1. अज्म - साहस, हिम्मत

2. आतशे-गुल - फूल रूपी अंगारों का डर (यानी अपनों का )
 

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मेरा इश्क भी खुदगरज हो चला है,
तेरे हुस्न को बेवफा कहते-कहते।

-'हसरत' मोहानी


1.खुदगरज - स्वार्थी, खुदमल्लब

 

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मेरे अरमानों को काश इतनी समझ हो 'वहशत',
कि वह उन आंखों से मुरव्वत का तकाजा न करें।

-'वहशत' कलकतवी


1.मुरव्वत - लिहाज, शील, संकोच, रिआयत 2. तकाजा - माँग
 

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