शेर-ओ-शायरी

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मैं अभी से किस तरह उनको बेवफा कहूँ

मंजिलों की बात है, रास्ते में क्या कहूँ।
-'नशूर' वाहिदी

 

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मैं जिसके हाथ में एक फूल देकर आया था,
उसी के हाथ का पत्थर मेरी तलाश में है।

-कृष्ण बिहारी नूर
 

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मैं भर सकता हूँ तेरी याद में हसरत भरी आहें,
मगर आहों की गर्मी से कहीं पत्थर पिघलते हैं?

-प्रेम बारबाटनी

 

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यगाने तो अपने नहीं बन सकेंगे,
तू गैरों को अपना बनाता चला जा।

-'अर्श' मल्सियानी


1. यगाना - स्वजन, आत्मीय, रिश्तेदार

 

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