शेर-ओ-शायरी

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वह दुश्मनी से देखते हैं देखते तो हैं,
मैं शाद हूँ कि हूँ तो किसी की निगाह में।

-अमीर मीनाई


1.शाद - प्रसन्न, खुश

 

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वह की खुलूस की तौहीन अहले-दुनिया ने
जबाँ पर लफ्जे-मुहब्बत गराँ गुजरता है।

-'निहाल' सेहरारवी


1.खुलूस - निष्कपट प्यार, मुहब्बत 2.तौहीन- बेइज्जती, अपमान

 3.अहले-दुनिया ने - दुनिया वालों ने 4.गराँ - भारी, वज्नी

 

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वह घबरा के जनाजा देखने बाहर निकल आये,
किसी ने कह दिया मय्यत जवाँ मालूम होती है।

 

1.मय्यत - शव

 

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