शेर-ओ-शायरी

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आम है यूँ तो मेरी बर्बादियों का वाकेआ,
वह भी तो कह दें, कोई मर मिटा मेरे लिये।

-उम्मीद लखनवी

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आया न एक बार भी अयादत को वह मसीह,
सौ बार मैं फरेब से बीमार हो चुका।

-'असीर' मीनाई


1. अयादत - रोगी का हालचाल पूछने और उसे ढाढस बंधाने के लिए जाना
 2. मसीह - हजरत ईसा, जो मुर्दों में जान डाल देते थे (यानी प्रेमिका)

 

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आये तो यूँ कि जैसे हमेशा थे मेहरबाँ,
भूले तो यूँ कि जैसे कभी आश्ना न थे।

-फैज अहमद फैज


1.आश्ना - (i) परिचित, जानकार, वाकिफ (ii) मित्र, दोस्त


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